जिस दिन जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में तीन जवान शहीद हो गए, उसी दिन अपनी चुनावी रैली में प्रधानमंत्री सर्जिकल स्ट्राइक की सफलता का बखान कर वोट मांग रहे थे.
‘…भाइयों बहनों, फौज के प्रति सम्मान क्या होता है, यह हमारी सरकार ने करके दिखाया है. भाइयों बहनों, हमने सर्जिकल स्ट्राइक किया, देश की सेना जवान कब तक मार झेलते रहेंगे? कब तक दुश्मनों का वार झेलते रहेंगे? भाइयों बहनों, वक्त बदल चुका है, दिल्ली में सरकार बदल चुकी है, मेरे देश का फौजी अब वार नहीं सहेगा. वह प्रतिवार करेगा.’
उत्तराखंड के श्रीनगर में आयोजित एक चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब ये शब्द बोल रहे थे, उसी समय मीडिया में खबरें रही थीं कि सीमा पर तीन जवान शहीद हो गए.
प्रधानमंत्री ने रविवार को अपनी रैली में सर्जिकल स्ट्राइक पर सरकार की पीठ ठोंकी और विपक्ष घेरने की कोशिश की. यदि प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी चुनावी रैलियों में सर्जिकल स्ट्राइक पर वोट मांग रहे हैं तो उनके और सरकार के दावे पर निश्चित ही यह विचार करना चाहिए कि वाकई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान की अकल ठिकाने आ गई है या नहीं?
हैरानी की बात है कि जिस सर्जिकल स्ट्राइक पर प्रधानमंत्री जनता का समर्थन मांग रहे हैं, उस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद सीमा पर झड़प, घुसपैठ, आतंकी हमले और गोलीबारी की घटनाएं उल्लेखनीय स्तर तक बढ़ गई हैं.
इंडियन एक्सप्रेस अखबार की खबर के मुताबिक, रविवार को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में सेना के तीन जवान शहीद हो गए. इस मुठभेड़ में चार आतंकी भी मारे गए.
इसके पहले 28 जनवरी को कुपवाड़ा में घुसपैठियों से मुठभेड़ में देहरादून के संदीप सिंह रावत शहीद हो गए थे.
बीते साल 18 सितंबर को चार आतंकवादियों ने उरी सेक्टर में आर्मी हेडक्वार्टर पर हमला कर दिया था, जिसमें 19 जवान शहीद हो गए थे. इसके बाद 28-29 सितंबर की रात सेना की स्पेशल फोर्स ने आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की थी. कहा गया कि सेना के कमांडोज ने एलओसी के पार जाकर पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकियों के 7 कैंप तबाह कर दिए, इस कार्रवाई में 38 आतंकी मारे गए.
इस कार्रवाई के बाद से ही भारत सरकार आम आदमी की भाषा में यह प्रचारित करने की कोशिश कर रही है कि उसने सेना को पाकिस्तान में घुसकर मारने की इजाजत दे दी है. लेकिन इस कार्रवाई से फायदा क्या हुआ?
आंकड़ों के मुताबिक, 2016 में पूरे साल भर में जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों में कुल 87 जवान शहीद हुए. साल 2008 के बाद किसी एक साल में यह शहादत का सबसे बड़ा आंकड़ा है. खबरों में कहा गया कि सर्जिकल स्ट्राइक की कार्रवाई के बाद से सीमा पर आतंकी हमलों और सैनिकों की शहादत में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई.
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद जम्मू-कश्मीर में करीब एक दर्जन आतंकी हमले हो चुके हैं. जिसमें शोपियां में सीआरपीएफ की टुकड़ी पर आतंकी हमले से लेकर कुलगाम की मुठभेड़ तक शामिल हैं.
बीते नवंबर में समाचार एजेंसी भाषा ने खबर दी कि ’29 सितंबर को पीओके में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर की गई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से पाकिस्तान नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गोलीबारी की 286 घटनाओं को अंजाम दे चुका है जिनमें 14 सुरक्षाकर्मियों सहित 26 लोगों की मौत हुई है.’
यानी जिस सर्जिकल स्ट्राइक को मोदी सरकार चुनावों में अपनी उपलब्धि बताकर वोट मांग रही है, उसके बाद सीमा पर संघर्ष विराम उल्लंघन और घुसपैठ की घटनाओं में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई.
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद 29 नवंबर को जम्मू के नगरोटा में आतंकियों ने सैन्य शिविर पर हमला किया जिसमें दो अधिकारी सहित सात जवान शहीद हो गए. यह हमला 16 कोर मुख्यालय के निकट सैन्य शिविर पर था जो सुरक्षा की दृष्टि से यह काफी संवेदनशील है. सेना की सबसे बड़ी ऑपरेशनल नगरोटा कोर के मुख्यालय के पास यह पहली बार था जब आतंकी हमला हुआ.
कुछ अन्य मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उरी हमले के बाद से 30 नवंबर तक 27 जवान पाकिस्तानी फायरिंग व आतंकी हमले में शहीद हुए.
टेरर वाच डेटा साइट साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल के मुताबिक, 2008 में कुल 90 जवान शहीद हुए थे. 2009 में यह संख्या 78 रही. 2010 में 67, 2011 में 30, 2012 में 17, 2013 में 61, 2014 में 51 और 2015 में 41 जवान आतंकी हमलों में शहीद हुए थे.
साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल के हवाले से द क्विंट बेवसाइट के मुताबिक, ‘उरी आतंकी हमले में मारे गए 18 जवानों से अलग 156 जवान अकेले नरेंद्र मोदी सरकार के दो साल के कार्यकाल में शहीद हुए हैं. आतंकी वारदातों में मारे गए जवानों की सालाना औसत मृत्यु दर पर नजर डालें, तो यह आंकड़ा कांग्रेस की मनमोहन सरकार से जरा भी कम नहीं है. बल्कि कश्मीर में आतंकी वारदातों की संख्या वाजयेपी और मनमोहन सरकार की तुलना में मोदी सरकार के दौरान बढ़ी हैं.’
साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल के मुताबिक, 1988 से लेकर सितंबर, 2016 तक आतंकी वारदातों में कुल 6,250 भारतीय सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं. जवाबी कार्रवाई में कुल 23,084 आतंकियों को भारतीय जवानों ने मारा. इन घटनाओं में करीब 15000 नागरिक मरे हैं. मौतों की इस आंकड़ेबाजी में बढ़ोत्तरी के सिवा नरेंद्र मोदी सरकार की क्या उपलब्धि है?
http://thewirehindi.com/1077/three-armyman-killed-modi-praise-his-gov/
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